रायपुर @ खबर बस्तर। सारकेगुड़ा कथित मुठभेड़ मामले को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासत गर्म हो गई है। कांग्रेस के आदिवासी विधायकों ने राज्यपाल से मुलाकात कर सारकेगुड़ा के गुनाहगारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
पीसीसी चीफ व कोंडागांव विधायक मोहन मरकाम व आबकारी मंत्री कवासी लखमा के नेतृत्व में मंगलवार को आदिवासी विधायकों का प्रतिनिधिमंडल राजभवन पहुंचा और गवर्नर अनुसूईया उईके से मुलाकात की।
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इस दौरान राज्यपाल को एक ज्ञापन भी सौंपा गया जिसमें सारकेगुड़ा मुठभेड़ को नरसंहार ठहराते आदिवासी नेताओं ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।

ज्ञापन में कहा गया है कि पूर्ववर्ती सरकार की गलत नीतियों के कारण छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद नासूर बन चुका है। इस पर लगाम लगाने की कोई ठोस नीति तैयार करने के बजाय मुठभेड़ के नाम पर निर्दोष ग्रामीण आदिवासियों को निशाना बनाया गया।
सारकेगुड़ा मुठभेड की न्यायिक जांच रिपोर्ट भी इस ओर इशारा कर रही है। इस रिपोर्ट में हुए खुलासे से यह साफ हो गया है कि 28-29 जून 2012 की दरमियानी रात निर्दोष आदिवासियों की नृशंस हत्या की गई। बीज पण्डुम को लेकर बैठक कर रहे महिलाओं, स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को मार डाला गया।
कांग्रेस पार्टी निर्दोष आदिवासियों को न्याय दिलाने की मांग करते हुए आदिवासियों के हत्यारों एवं उनको सरंक्षण देने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग करती है।
कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल में बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल, दंतेवाड़ा विधायक देवती कर्मा, कांकेर विधायक शिशुपाल सोरी, बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी, नारायणपुर विधायक चंदन कश्यप, रामानुजगंज विधायक बृहस्पति सिंह, चित्रकोट विधायक राजमन बेंजाम, सिहावा विधायक लक्ष्मी ध्रुव व अंतागढ़ विधायक अनुप नाग मौजूद रहे।
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