OP चौधरी की राह पर एक और नौकरशाह… ये IAS अफसर नौकरी छोड़ करेंगे राजनीति ! VRS के लिए किया आवेदन, इस पार्टी में जाने की अटकलें तेज
रायपुर @ खबर बस्तर। छत्तीसगढ़ में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं और इससे पहले एक बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, प्रदेश में पदस्थ एक आईएएस अफसर नौकरी छोड़ राजनीति में आने की तैयारी में हैं।
2008 बैच के आईएएस अफसर नीलकंठ टेकाम ने वीआरएस के लिए आवेदन किया है। इसके बाद से उनके राजनीति में जाने की अटकलें तेज हो गई हैं।
खबरों के मुताबिक, IAS नीलकंठ टेकाम भाजपा का दामन थाम सकते हैं। बताया जा रहा है कि वे लंबे समय से बीजेपी के नेताओं के संपर्क में हैं। हालांकि, अभी भाजपा या फिर टेकाम की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
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— Khabar Bastar (@khabarbastar) May 24, 2023
बता दें कि कांकेर जिले के अंतागढ़ ब्लॉक के रहने वाले आईएएस नीलकंठ टेकाम कोंडागांव जिले के कलेक्टर रह चुके हैं। इसके अलावा बस्तर के अन्य जिलों में भी वे अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
वर्तमान में टेकाम संचालक कोष एवं लेखा के पद पर पदस्थ हैं। मंत्रालयीन सूत्रों के मुताबिक, टेकाम ने वीआरएस के लिए आवेदन कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग उनके आवेदन का परीक्षण कर रहा है।
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बताया गया है कि व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए IAS नीलकंठ टेकाम ने वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) मांगा है। जबकि वो साल 2027 में रिटायर होंगे। ऐसे में उनके राजनीति ज्वाइन करने की खबरें सियासी गलियारे में तैरने लगी है।
इस सीट से चुनाव लड़ने की अटकलें
सूत्रों की मानें तो नीलकंठ टेकाम बस्तर की केशकाल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। इस सीट पर पिछले 3 चुनाव में भाजपा को लगातार हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में चर्चा है कि बीजेपी टेकाम को केशकाल से उम्मीदवार बना सकती है।
टेकाम अगर राजनीति में आते हैं तो वे ओपी चौधरी के बाद ऐसे दूसरे आईएएस होंगे, जिन्होंने नौकरी छोड़कर राजनीति में अपना भविष्य तलाशा है।
क्षेत्र में अच्छी पकड़
गौरतलब है कि आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले नीलकंठ टेकाम क्षेत्र में खासे लोकप्रिय हैं। स्थानीय होने के चलते क्षेत्रवासियों से उनका सीधा संपर्क है। सूत्र बताते हैं कि कई आदिवासी संगठन भी उनके साथ संपर्क बनाए हुए हैं।
नीलकंठ टेकाम पढाई-लिखाई के दौरान छात्र राजनीति में काफी सक्रिय रहे हैं। कॉलेज के दिनों में वे छात्रसंघ के अध्यक्ष भी रहे। वहीं आदिवासी होने के कारण उनका बस्तर इलाके में खासा प्रभाव है।
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