नई शिक्षा नीति के विरोध में नक्सलियों ने जारी किया प्रेस नोट… लिखा— शिक्षा का निजीकरण कर रही सरकार, आदिवासियों को ज्ञान से दूर रखने की साजिश
के. शंकर @ सुकमा। केन्द्र सरकार द्वारा लागू की जा रही नई शिक्षा नीति को लेकर नक्सलियों ने ऐतराज जताया है। इस बारे में माओवादियों ने प्रेसनोट जारी कर शिक्षा नीति से होने वाले कथित नुकसान के बारे अपनी बात रखी है।
कटेकल्याण एरिया कमेटी द्वारा 5 सितंबर शिक्षक दिवस पर जारी प्रेसनोट में कहा गया है कि केंद्र-राज्य सरकारों द्वारा कॉरपोरेट घरानों के हितों के लिए लाए जा रहे नए शिक्षा नीति का विरोध करें। इसके जरिये सरकार शिक्षा का निजीकरण करना चाहती है, जो क्षेत्र हित में नहीं है।
नक्सलियों ने कहा है कि बस्तर संभाग में चलने वाले आंगनबाडी, प्राथमिक शाला, मिडिल स्कूल, हाई स्कूल और पोटाकेबिन आश्रम में पढ़ाने वाले शिक्षाकर्मियों को हटा कर केंद्र-राज्य सरकारों ने ऑनलाइन व प्रोजेक्ट का सहारा लेकर पढ़ाई करवाने में लगी हुई हैं। यह दलितों, आदिवासियों व पिछड़े वर्गों को शिक्षा से दूर रखने की साजिश हैं।
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माओवादियों का आरोप है कि 21 वीं सदी में आरएसएस, भाजपा सरकार द्वारा नई शिक्षा के नाम से ऑनलाईन, निजीकरण, व्यवसायीकरण, भगवाकरण का काम जारी रखा गया है। मोदी सरकार आदिवासी बच्चों को अच्छी पढ़ाई-अच्छी नौकरी देने की बात कहते हुए उल्टे 10 करोड से ज्यादा बेरोजगारों की नौकरी छीन ली है। वहीं एक लाख से ज्यादा स्कूलों को बंद किया गया है।
सरकार की इस नीति से प्राइवेट स्कूलों को खुली छूट देकर देश-विदेशी पूँजीपतियों को पैसा कमाने का अवसर दिया जा रहा है। सरकारें शिक्षा को एनजीओ को सौंप रही हैं और कई सालों से आदिवासी गांवों में चल रहे शालाओं को युक्ती-युक्तीकरण कर बंद किया गया है। इन स्कूलों को पुरानी जगह पर खोलने के बजाय सरकार इस बजट को अर्ध सैनिक बल, एसटीएफ, सीआरपीएफ, डीआरजी को अबंटित कर रही है।
नक्सलियों ने प्रेसनोट में कहा है कि पोटाकेबिन जैसे स्कूलों में पढ़ने वाले आदिवासी, अल्पसंख्यक, दलित बच्चों के ऊपर पुलिस प्रशासन द्वारा छेड़-छाड़ करने की घटनाएं कई सालों से सामने आ रही है। स्कूलों में कई समस्याओं का सामना करते हुए छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं।
पौष्टिक भोजन व सेहत की देखभाल की मांग
नक्सलियों ने दंतेवाड़ा जिले में सभी स्कूल, छात्रवासों में स्कूली छात्रों को प्रोटीन युक्त भोजन जैसे मांस, मछली, अण्डा, मटन हर सप्ताह देने की मांग की है। प्रेस नोट में कहा गया है कि स्कूलों में छात्र-छात्राएं पौष्टिक आहार से वंचित होने के कारण बच्चे तर्क ज्ञान से दूर हो रहे हैं। कई स्कूलों में बीमार होने पर छात्र-छात्राओं का सही समय पर इलाज नहीं हो रहा है।
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