52वां शक्तिपीठ माना जाता है दंतेवाड़ा का दंतेश्वरी मंदिर… माता के दर्शन को देशभर से आते हैं श्रद्धालु, जानिए, मंदिर निर्माण की रोचक कहानी
दंतेवाड़ा @ खबर बस्तर। आज से पूरे देश में शारदीय नवरात्र पर्व की शुरूआत हो चुकी है। देवी मंदिरों में मनोकामना ज्योत की स्थापना के साथ ही दर्शन-पूजन का दौर शुरू हो चुका है।
नवरात्रि के पावन अवसर पर आज हम आपको छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर अंचल में अवस्थित एक ऐसे अलौकिक मंदिर के इतिहास से रूबरू कराने जा रहे हैं, जिसे देश का 12वां शक्तिपीठ माना जाता है।
वैसे तो देवी पुराण में 51 शक्तिपीठों का जिक्र है, लेकिन कुछ स्थानीय मान्यताएं छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में मौजूद दंतेश्वरी मंदिर को 52वां शक्तिपीठ होने का दावा करती है। इस ऐतिहासिक मंदिर के निर्माण को लेकर कई कहानियां और किवंदतियां प्रसिद्ध हैं।
ऐसी मान्यता है कि यहां माता सती के दांत गिरे थे, इसी वजह से इस इलाके का नाम दंतेवाड़ा पड़ा। वहीं माता के स्वरूप को भी दंतेश्वरी माई के नाम से ही जाना जाता है।
बता दें कि मां दंतेश्वरी को बस्तर की कुल देवी माना जाता है। दंतेवाड़ा में स्थित पुरातात्विक महत्व के इस मंदिर का निर्माण 14वीं सदी में चालुक्य राजाओं ने करवाया था। मंदिर की वास्तुकला में भी दक्षिण भारतीय शैली झलकती है।
मंदिर में मां दंतेश्वरी की षष्टभुजी काले रंग की मूर्ति स्थापित है। यह मंदिर अपनी समृद्ध वास्तुकला और मूर्तिकला और समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के कारण जाना जाता है।
यह मंदिर शंखिनी और डंकिनी नदी के संगम पर स्थित है। इस मंदिर का जीर्णोद्धार पहली दफा वारंगल के पांडव अर्जुन कुल के राजाओं ने लगभग 700 साल पहले करवाया था। वहीं साल 1932-33 में तात्कालीन बस्तर महारानी प्रफुल्ल कुमारी देवी ने इसका दूसरी दफे जीर्णोद्धार कराया था।
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