के. शंकर @ सुकमा। धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में एक इलाका ऐसा भी है जहां के किसानों ने अब धान के साथ ही कपास की खेती को अपनी आय का जरिया बना लिया है।
हम बात कर रहे हैं बस्तर के सुदूरवर्ती व नक्सल प्रभावित सुकमा जिले की, जहां किसान बीते कुछ अरसे से कपास की खेती बखूबी कर रहे हैं। जिले के मरईगुड़ा क्षेत्र में लगभग 200 किसान कपास की फसल उगा रहे हैं।
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मरईगुड़ा की रहने वाली वेंकट लक्ष्मी बताती है कि उनके 15 एकड़ खेत में कपास की फसल की गई है। लगभग 170 क्विंटल उत्पादन होने की संभावना है। इससे लगभग साढ़े 6 से 7 लाख रूपए की आमदनी होगी। लक्ष्मी के मुताबिक कपास की खेती को लेकर अब किसानों की सोच बदल रही है।
बता दें कि कोंटा तहसील के अंतर्गत मरईगुड़ा और मुरलीगुड़ा इलाके के कई गांवों में किसानों ने धान के साथ ही कपास की खेती को भी अपना लिया है। इससे वे अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं। अकेले मरईगुड़ा गांव में ही लगभग 300 एकड़ में कपास की खेती की गई है।
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