बीजापुर/दंतेवाड़ा @ खबर बस्तर। बस्तर में निर्माण कार्यों की आड़ में विभागीय अफसरों व ठेकेदारों ने सरकारी राशि के बंदरबाट और भ्रष्टाचार को अपनी तिजोरी भरने का जरिया बना लिया है। ताजा मामला नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले का है, जहां सड़क निर्माण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी उजागर हुई है।
बीजापुर के एक कांग्रेस नेता की कंस्ट्रक्शन कंपनी ने भ्रष्टाचार की ऐसी सड़क का निर्माण कर डाला, जिसमें चंद महीने बाद ही 700 से ज्यादा गड्ढे हो गए हैं। गुणवत्ताहीन सड़क बनाने के बावजूद कंपनी का तो भुगतान भी हो गया पर स्थानीय ग्रामीणों के हिस्से बदहाल सड़क आई है।

छग-तेलंगाना की सरहद पर बसे पामेड़ में आजादी के 70 साल बाद सड़क का निर्माण शुरू हुआ। 9.60 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 12 किमी लंबे सड़क निर्माण का ठेका जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष जयकुमार नायर की कंस्ट्रक्शन कंपनी को मिला था।
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सड़क निर्माण कार्य जब शुरू हुआ तो लोगों को उम्मीद थी कि उन्हें जल्द ही अच्छी सड़क की सौगात मिलेगी, लेकिन सड़क के घटिया निर्माण से ग्रामीणों के अरमानों को भी झटका लगा है।

बता दें कि ठेकेदार ने तमाम नियम-कायदों को ताक में रखकर बेहद गुणवत्ताहीन सड़क का निर्माण किया। यही वजह रही कि निर्माण के चंद महीनों बाद ही सड़क में 700 से ज्यादा गड्ढे हो चुके हैं। इतना ही नहीं पहली ही बारिश में बरसाती नाले पर बनाया गया एक पुल भी बह चुका है, जिसे ग्रामीणों व जवानों ने पत्थरों से भरकर आने-जाने लायक बनाया है।

1200 जवानों की तैनाती थी
दरअसल, नक्सलियों के रेड कॉरिडोर माने जाने वाले इस इलाके में सड़क का निर्माण बड़ी चुनौती थी। सुरक्षा के लिहाज से सड़क निर्माण से पहले तेलंगाना के चेरला के कालीवेरू व चेलमेला के अलावा तिप्पापुरम, तोंगगुडा, सहित पामेड़ में सीआरपीएफ, सीएएफ, कोबरा, डीआरजी और जिला बल के करीब 1200 सशस्त्र जवानों को तैनात किया गया था। वहीं 12 किमी के दायरे में एक थाने के साथ ही 5 बेस कैंप भी स्थापित किए गए थे।
सड़क निर्माण में जवानों ने दी कुर्बानी
सड़क के निर्माण के दौरान मौके पर तैनात कई जवानों ने अपनी जान की परवाह किए बिना अपना फर्ज निभाया। सड़क निर्माण के दौरान 6 बार नक्सलियों ने हमला किया। फरवरी 2018 को नक्सलियों द्वारा लगाए गए प्रेशर आईईडी की चपेट में आने से सहायक आरक्षक सोनधर हेमला की मौके पर ही मौत हो गई।
इसी साल 3 फरवरी को हुए नक्सली हमले में प्रधान आरक्षक अरविंद कुमार घायल हो गए थे। वहीं 10 मार्च 2018 को प्रेशर आईईडी की चपेट में आकर दो जवान जख्मी हुए, जिसमें आरक्षक सूरज मंडावी का दायां पैर शरीर से हमेशा के लिए अलग हो गया तो वहीं दूसरा जवान दुरपत सिंह ठाकुर गंभीर रूप से घायल हुआ। इतनी कुर्बानियों के बाद भी जवानों के हौसले पस्त नहीं हुए और वो सड़क निर्माण की सुरक्षा में डटे रहे।

घटिया निर्माण से ग्रामीणों में आक्रोश
सड़क निर्माण कार्य में बरती गई लापरवाही और भ्रष्टाचार से इस इलाके के ग्रामीण काफी आहत हैं। स्थानीय निवासी सुमन कोत्तुल, भास्कर वंकैया और कोत्तुल श्रीनिवास बताते हैं कि बारिश के दिनों में उन्हें आने-जाने में काफी दिक्कतें होती थी। सड़क बन जाने से उन्हें काफी सहूलियत हुई थी लेकिन कुछ ही दिनों में सड़क की हुई दुर्दशा से उन्हें एक बार फिर परेशान कर दिया है।
राजनीति तेज, भाजपा को मिला मुद्दा
कांग्रेस नेता की कंपनी द्वारा घटिया सड़क के निर्माण को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है। भाजपा जिला महामंत्री श्रीनिवास मुदलियार ने इस मामले की जांच की मांग करते हुए कहा है कि संबंधित कंस्ट्रक्शन कंपनी और संबंधित विभाग के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
इधर, कलेक्टर और जिला निर्माण समिति के अध्यक्ष केडी कुंजाम पूरे मसले से पल्ला झाड़ते दिख रहे हैं। उनके मुताबिक अभी सड़क पूरी तरह से नहीं बनी है। सड़क पर कुछ ही जगहों पर गड्ढे हुए हैं। ठेकेदार को पूरा भुगतान नहीं किया गया है।
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